छात्रों पर लाठीचार्ज – आवाज़ उठाने की कीमत क्यों इतनी भारी?
छात्रों पर लाठीचार्ज – आवाज़ उठाने की कीमत क्यों इतनी भारी? देश का भविष्य अगर किसी के हाथों में है, तो वह है छात्र. लेकिन जब इन्हीं छात्रों की आवाज़ दबाने के लिए उन पर लाठियाँ बरसाई जाती हैं, तो यह सिर्फ उनकी पीड़ा नहीं बल्कि लोकतंत्र की जड़ों पर प्रहार है। हाल ही में बाराबंकी (उत्तर प्रदेश) में छात्रों पर हुआ लाठीचार्ज इसी कटु सच्चाई का ताज़ा उदाहरण है। क्या था मामला? बाराबंकी के छात्रों ने अपनी समस्याओं को लेकर आवाज़ उठाई थी। उनकी मांगें बहुत साधारण थीं – बेहतर सुविधाएँ, निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया, और शिक्षा से जुड़ी परेशानियों का हल। लेकिन बातचीत और समाधान की जगह उन्हें पुलिस की लाठियाँ मिलीं। वीडियो और तस्वीरों में साफ दिखता है कि निहत्थे छात्रों पर बेरहमी से डंडे बरसाए गए। छात्रों का दर्द और समाज की चुप्पी सोचिए, जो छात्र कल देश की तरक्की की कमान संभालेंगे, वही आज सड़कों पर खून से लथपथ पड़े हुए हैं। यह सिर्फ शारीरिक चोट नहीं है, बल्कि उनके आत्मसम्मान पर गहरा वार है। और सबसे बड़ा सवाल यह है कि समाज चुप क्यों है? क्या छात्रों की आवाज़ को दबाना इतना आसान हो गया है कि लाठीचार्ज को ...